Rigveda Quotes in Hindi – ऋग्वेद के अनमोल विचार
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Rigveda Quotes in Hindi – ऋग्वेद के अनमोल विचार

Rigveda Quotes in Hindi - ऋग्वेद के अनमोल विचार

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  • मनुष्य अपनी परिस्थितियों का निर्माता आप है। जो जैसा सोचता है और करता है, वह वैसा ही बन जाता है।  – Rigveda ऋग्वेद
  • मन और हृदय को एक करो। अंतरात्मा की प्रेरणा के अनुरूप ही मन और बुद्धि को चलाओ। – Rigveda ऋग्वेद
  • असत्य नहीं, सत्य ही बोलिए। सत्य के पथ पर चलना परम शांतिदायक राजमार्ग है। – Rigveda ऋग्वेद
  • सत्य की पुकार बहरे कानों में भी पहुँचती है। जो सचाई है उसे आज नहीं तो कल लोग स्वीकार करेंगे ही। – Rigveda ऋग्वेद
  • मनुष्य जीवन श्रेष्ठ और बड़ा बनने के लिए है। जीवन दिन काटने के लिए नहीं, कुछ महान कार्य करने के लिए हैं। – Rigveda ऋग्वेद
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  • हंस की तरह गुणग्राहक बनो। बेकार और बुरी बातों को छोड़कर केवल उपयोगी को ही
    ग्रहण करो। – Rigveda ऋग्वेद
  • जो गुणवान हैं उनकी प्रशंसा होती है। गुणविहीन व्यक्ति का कहीं आदर नहीं होता। – Rigveda ऋग्वेद
  • कानों से अच्छे विचार ही सुनो। दूसरों की निंदा और त्रुटियाँ सुनने में अपना समय नष्ट न करो। – Rigveda ऋग्वेद
  • द्वेष नहीं प्रेम करो – Rigveda ऋग्वेद
  • अग्नि से अग्नि और आत्मा से आत्मा प्रदीप्त होती है। दीप्तमान आत्माओं के संपर्क में रहकर अपनी आत्मा को प्रदीप्त करो। – Rigveda ऋग्वेद
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  • हम सब परस्पर सज्जनता का व्यवहार करें। सज्जनों का व्यवहार, उदारता, सहायता एवं स्नेहपूर्ण होता है। – Rigveda ऋग्वेद
  • क्रोध को नम्रता से शांत करो। क्रोधी एक प्रकार का रोगी है । उस पर बिगड़ो नहीं दया करो। – Rigveda ऋग्वेद
  • जो आकांक्षा करता है उसे प्राप्त होता है। तीव्र इच्छाशक्ति के बिना महत्त्वपूर्ण वस्तु प्राप्त नहीं होती। – Rigveda ऋग्वेद
  • उनके साथ रहो जो निडर और वीर हैं। कायर, डरपोक, ओछे और दुर्गुणी लोगों का संग करना ही अपनी ही हानि करना है।– Rigveda ऋग्वेद
  • वह कार्य करो जिससे दूसरों को कष्ट न हो। उन कर्मों को न करो जिनसे दूसरे दु:ख पावें । – Rigveda ऋग्वेद
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Rigveda quotes in hindi

  • उस मार्ग पर मत चलो जिस पर अज्ञानी चलते हैं। अज्ञानी वे हैं जो कुमार्ग पर चलकर सुख की आशा
    करते हैं। – Rigveda ऋग्वेद
  • सत्य मार्ग पर चलने वालों का जीवन सरल हो जाता है। कंटकाकीर्ण मार्ग झूठों का है, सत्यप्रेमी के लिए सर्वत्र सरलता है। – Rigveda ऋग्वेद
  • मनुष्य शुभ कार्य करके देव बनते हैं। शुभ कर्म करो और इसी शरीर से वह पद प्राप्त करो। – Rigveda ऋग्वेद
  • मनुष्यों में कोई नीच – ऊँच नहीं, सब भाई-भाई हैं। जाति-पाँति के आधार पर किसी को ऊँच-नीच न समझो। – Rigveda ऋग्वेद
  • एक ही परमपिता के पुत्र हम सब भाई-भाई हैं। आपस में ऐसे बरतो जैसे भाई से भाई बरतते हैं। – Rigveda ऋग्वेद
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  • एक ही परमात्मा को ज्ञानी लोग अनेक नामों से पुकारते हैं। अनेक नामों के देवता ईश्वर के ही विभिन्न नाम हैं।– Rigveda ऋग्वेद
  • यह संपूर्ण विश्व परमात्मा का ही रूप है। संसार को परमात्मा का प्रत्यक्ष स्वरूप मानकर इसकी सेवा
    करनी चाहिए। – Rigveda ऋग्वेद
  • जीवन में स्फूर्ति, उत्साह और साहस बढ़ता रहे। आलसी, प्रमादी, भीरु और संदेही मनुष्य उन्नति नहीं कर सकते। – Rigveda ऋग्वेद
  • अतुलित शौर्य और असीम बुद्धि धारण करो । – Rigveda ऋग्वेद
  • उत्साही और आशावादी का ही साथ करो। उनसे दूर रहो जो भविष्य को निराशाजनक बताते हैं। – Rigveda ऋग्वेद
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  • उनकी प्रशंसा करो जो धर्म पर दृढ़ हैं। उनके गुणगान न करो जिनने अनीति से सफलता प्राप्त की। – Rigveda ऋग्वेद
  • एक प्रकार के विचार रखो, एक समिति में संगठित रहो। विचारों की एकता और संगठन से एक प्रचंड शक्ति उत्पन्न होती है। – Rigveda ऋग्वेद
  • शक्तियों का संगठन करो, सदविचारों का संगठन करो। संगठन से बढ़कर शुक्तिशाली तत्त्व इस पृथ्वी पर दूसरा नहीं। – Rigveda ऋग्वेद
  • कर्त्तव्य के पथ पर क्या उचित है, क्या अनुचित यह निरंतर विचारते रहो। अंधपरंपरा को छोडकर तर्क और विवेक का आश्रय ग्रहण करो। – Rigveda ऋग्वेद
  •  तृष्णा नष्ट होने के साथ ही विपत्तियाँ भी नष्ट होती हैं। जिसे जितनी अधिक तृष्णा है, वह उतना ही बड़ा आपत्तिग्रस्त है। – Rigveda ऋग्वेद
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Rigveda quotes in hindi

  • कुविचारों और कुकर्मों को दूर करो। वे अपने धारण करने वालों को ही नष्ट करते हैं। – Rigveda ऋग्वेद
  • न कमाने वाले त्यागी से कमाकर दान करने वाला श्रेष्ठ है। सौ हाथों से कमाओ, हजार हाथों से दान करो। – Rigveda ऋग्वेद
  • धन उन्हीं के पास ठहरता है जो सद्गुणी हैं। दुर्गुणी की विपुल संपदा भी स्वल्प काल में नष्ट हो जाती है। – Rigveda ऋग्वेद
  • दान देने वाले की संपदा घटती नहीं बढ़ती है। सत्कार्यों में लगाया धन, बैंक में जमा पूँजी के समान सुरक्षित है। – Rigveda ऋग्वेद
  • वह अन्न खाओ जो पाप की कमाई का न हो। पाप की कमाई का अन्न बुद्धि को बिगाड़ता है। – Rigveda ऋग्वेद
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  • जीभ पर काबू रखो, स्वाद के लिए नहीं स्वास्थ्य के लिए खाओ। – Rigveda ऋग्वेद
  • सर्वभक्षी लोग रोगों की अग्नि में जलते हैं। भक्ष-अभक्ष का विचार न करने वाले लोग बीमारी और अल्पायु पाते हैं। – Rigveda ऋग्वेद
  • जैसा अन्न खाते हैं, वैसा मन बनता है। सतोगुणी भोजन से ही मन की सात्विकता स्थिर रहती है। – Rigveda ऋग्वेद
  • जो मर्यादाओं का पालन करता है, वही पाप से बचता है। बुराइयों की ओर ढीला मन रखने से फिसलने का भय है। – Rigveda ऋग्वेद 
  • दुष्टों को आगे मत बढ़ने दो। बुरों की उन्नति में किसी प्रकार सहायक न बनो। – Rigveda ऋग्वेद

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