Who is Buddha ? बुद्ध का वास्तविक अर्थ

बुद्ध से किसी ने पूछा, तुम कौन हो?

क्योंकि इतने सुंदर थे!

देह तो उनकी सुंदर थी ही, लेकिन ध्यान ने और अमृत की वर्षा कर दी थी,

ध्यान  ने उन्हें और नई आभा दे दी थी। 

एक अपूर्व सौंदर्य उन्हें घेरे था।

एक अपरिचित आदमी ने उन्हें देखा और पूछा: तुम कौन हो?

क्या स्वर्ग से उतरे कोई देवता?

बुद्ध ने कहा: नहीं।

तो क्या इंद्र के दरबार से उतरे हुए गंधर्व?

बुद्ध ने कहा: नहीं।

तो क्या कोई यक्ष?

बुद्ध ने कहा: नहीं।

ऐसे वह आदमी पूछता गया, पूछता गया – क्या कोई चक्रवर्ती सम्राट ?

बुद्ध ने कहा: नहीं। 

तो उस आदमी ने पूछा : कम से कम आदमी तो हो!बुद्ध ने कहा: नहीं।

तो क्या पशु पक्षी हो?बुद्ध ने कहा: नहीं। 

तो उसने फिर पूछा थककर कि फिर तुम हो कौन, तुम्हें कहो? 

तो बुद्ध ने कहा: मैं सिर्फ एक जागरण हूं।

मैं बस जागा हुआ, एक साक्षी मात्र।

वे तो सब नींद की दशाएं थीं।

कोई पक्षी की तरह सोया है, कोई पशु की तरह सोया है।
कोई मनुष्य की तरह सोया है, कोई देवता की तरह सोया है।

वे तो सब सुषुप्ति की दशाएं थीं।

कोई स्वप्न देख रहा है गंधर्व होने का, कोई यक्ष होने का, कोई चक्रवर्ती होने का।
वे सब तो स्वप्न की दशाएं थीं।
वे तो विचार के ही साथ तादात्म्य की दशाएं थीं।

मैं सिर्फ जाग गया हूं।
मैं इतना ही कह सकता हूं कि मैं जागा हुआ हूं।
मैं सब जागकर देख रहा हूं। मैं जागरण हूं—मात्र जागरण!

जो समाधि को उपलब्ध है, वही जागा हुआ है।

इसलिए हमने समाधिस्थ
लोगों को बुद्ध कहा है।

बुद्ध का अर्थ होता है: जागा हुआ।

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