हमेशा खुश कैसे रहे – Hamesha khush kaise rahe

हमेशा खुश कैसे रहे – Hamesha khush kaise rahe

हमेशा खुश कैसे रहे - Hamesha khush kaise rahe

"khush kaise rahe", "Quotes"

एक नगर में एक धनवान शेठ रहेता था। उसके दो पुत्र थे।

एकदिन अचानक शेठ का देहांत हो जाता हे।

शेठ के देहांत के बाद उनके दोनों पुत्र कुछ समय तक साथ में रहे।

लेकिन बादमे कुछ बात को लेकर दोनों में झगड़ा हुआ और दोनोने सारी  संपत्ति को आपस में बाटकर अलग होने का फैसला किया।

दूसरे दिन जब दोनों सारी संपत्ति को आधा आधा बाट रहे थे तब उनको एक बॉक्स मिलता हे।

जिसको उसके पिताजी ने बड़ी सावधानी पूर्वक छुपाकर रखा था।

उन्होंने उस बॉक्स को खोला और देखा तो उसमे दो अँगूठिया थी। 

एक बहुमूल्य हिरे से जड़ी हुयी थी तो दूसरी चांदीकी  मामुली अंगूठी थी।

हिरे की अंगूठी को देखकर बड़े भाई के मन में लालच आ गया।

वह अपने छोटे भाई को समझाने लगा की मुझे ऐसा लगता हे की यह अंगूठी हमारे पिताकी कमाई हुयी नहीं हे।

यह उनके पूर्वजो से उत्तराधिकार में मिली हे। इसी कारण  से पिताजी ने इसे अपनी संपत्ति से अलग रखा हे।

इसे हमारे परिवार ने पेढ़ीओंसे संभालकर रखा हे। इसलिये  हमें भी इसे भावी पेढ़ीओंके लिये  संभालकर  रखना चाहिये।

इसलिये  बड़ा होने के नाते इसे में संभालकर  रखूँगा।

छोटा भाई मुस्कुराया और बोला  ठीक हे आप हिरेवाली अंगूठीसे खुश रहे में चांदीवाली अंगूठी से खुश रहूँगा।

दोनों भाई ने अंगूठीया अपनी अपनी उंगलियोमे पहन ली और अपने अपने काम में लग गये।

छोटे  भाई ने अपने  मनमें सोचा यह तो मेरी समझ में आसानी से आता हे की पिताजीने इस मूल्यवान हिरेकी अंगूठी को  संभालकर रखा लेकिन पिताजीने इस चांदी की मामूली अंगूठी को क्यों संभालकर रखा।

उसने गौर से उस चांदी की अंगूठी को  देखा तो उन्हें उस पर खुदे हुए कुछ शब्द दिखे।  उस पर लिखा था “यह भी बदल जायेगा “

 उसे लगा शायद यह मेरे पितजीकी शिख हे  ऐसा समझकर उसने अंगूठी दुबारा पहन ली।

दोनों भाई जिंदगी में उतार चढाव  का सामना करते रहे।

जीवनमे जब भी अच्छा समय आता तो बड़ा भाई अपना मन का संतुलन खोकर उछलने लगता और जब बुरा समय आता तो वह गहरी  निराशा में डुब जाता  वह स्ट्रेस और डिप्रेशन में चला जाता।

इसके चलते उसे कई बीमारिया भी लग गई। अनिद्रा के कारण वह नींद की गोलिया लेने लगा। 

बाद में वह ऐसी स्थिति में पहोच गया जहा  उसे बिजली के झटके देने की आवश्यकता  आ गई।

 और जो चांदीकी  अँगूठीवाला छोटा भाई था उसके जीवन में जब भी अच्छा समय आता तो वह उसका  भरपूर आनंद उठाता। 

उस समय को बड़ी मस्ती से जीता था।  उसको हमेशा यह बोध रहता था की यह समय भी बदल जायेगा।

और जब वो बदल जाता तो वह मुस्कुराता और कहता मुझे पहले से पता था यह बदलने वाला हे

और जब उसके जीवन में बुरा समय आता तो वह अपनी अंगूठी को देखता और याद करता की यह भी बदल जायेगा। और सचमे कुछ दिनों में वह समय भी बदल जाता था।

 जीवन के सभी उतार चढाव को वह जानता रहेता वह समझ गया था की जीवनमे कुछ भी हंमेशा रहनेवाला नहीं हे।

हर एक चीज जाने के लिए आती हे। चाहे वह सुख हो या दुःख, अच्छा समय हो या बुरा। वह अपना मन का संतुलन नहीं खोता और शांत  सुखी जीवन व्यतीत करता।

Moral Of Story

              इस कहानी से हमें यह शीख  मिलती हे की इस दुनिया में सब कुछ परिवर्तनशील हे, सब कुछ बदल रहा हे चाहे वह वस्तु हो, व्यक्ति  हो, या परिस्थिति।

           सब कुछ बदल रहा हे। इस बदलती हुई  दुनियामे , अच्छे और बुरे समय में सुख और दुःख में अगर आपको हंमेशा खुश रहना हे तो इस एक छोटी सी लाइन को अपने मन की गहराय  तक जाने दे की

                                      “यह भी बदल जायेगा” 

ताकि जब भी आपकी लाइफ कैसी भी परिस्थिति आये तो आपको यह बोध रहे की यह परिस्थिति भी बदल जायेगी।

               यह छोटी सी लाइन आपकी सोच को बदल देती हे और आप अपने मन को शांत  रखकर बड़े आराम से उस परिस्थिति को हैंडल कर सकते हे।

        सबके जीवन में सुख और दुःख आता ही हे ऐसा नहीं होता की किसीके जीवन में सुख तो आये लेकिन दुःख न आये।

दुःख भी सभी के जीवन में आता ही हे। इसलिये  जब भी जीवन में दुःख आये तो निराश मत हो, दुखी मत हो बस यह याद रखे की यह समय भी बदल जायेगा।

      और जब आपकी सोच ऐसी हो जाती हे, आपकी समझ ऐसी हो जाती हे तो फिर जीवन की कोई भी परिस्थिति आपको दुखी नहीं कर सकती। और आप हंमेशा खुश रहोगे।

yah bhi badal jayega

Leave a Reply

Close Menu