गुरु पूर्णिमा का महत्व – Guru Purnima 2020 – Importance of Guru Purnima

‘ गुरु ‘  शब्द का संयोजन दो शब्दों से होता हे 
‘ गु ‘  यानि अज्ञान रूपी अंधकार और
‘ रु ‘ यानि दूर करनेवाले 
 
अर्थात गुरु यानि जो हमारे अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करते हे ।
 
गुरु साधक के अज्ञान को मिटाता है, ताकि वह अपने भीतर ही सृष्टि के स्रोत का अनुभव कर सके।
 

गुरु पूर्णिमा का महत्व

पारम्परिक रूप से गुरु पूर्णिमा का दिन वह दिन हे जब साधक गुरु को अपना आभार अर्पित करते हे और गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हे। 

ध्यान और योग साधना का अभ्यास करने के लिए गुरु पूर्णिमा का दिन विशेष लाभ प्रदान करनेवाला दिन माना जाता हे ।

हिन्दु धर्म में गुरु पूर्णिमा का महत्व

हिन्दु धर्म में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता हे क्योंकि इस दिन भगवान वेद व्यास का जन्म मनाया जाता हे।
 
भगवान वेद व्यास ने वेदों की  रचना की थी। इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है ।
 
गुरु पूर्णिमा के  दिन भगवान वेद व्यास ने इन वेदों को चार भाग में विभाजित किया सामवेद यजुर्वेद, अथर्ववेद और ऋग्वेद ।
 
इन चार वेदों के लिखने की शरुआत इस  दिन से  हुयी ।
 
उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। 

बौद्ध और जैनधर्म के अनुसार गुरु पूर्णिमा का महत्व

बौद्ध धर्म के अनुसार यह वह दिन हे जब भगवान बुद्ध ने अपने केवल ज्ञान के पश्चात पहेली देशना दी थी ।
 
धम्मपद को लिखने की शरुआत हुयी गुरु पूर्णिमा के दिन से ।
 
जैनधर्म के अनुसार गुरु पूर्णिमा वह दिन हे जब इंद्रभूति गौतम ( गौतम स्वामी ) पहले शिष्य बने थे भगवान महावीर के ।
 
 इस प्रकारसे यह दिन इस लिये भी बहोत महत्वपूर्ण और खास हे क्योंकि इसी दिन से वेदोंको लिखने की शरुआत, धम्मपद को लिखने की शरुआत, गुरु-शिष्य परंपरा की शरुआत हुयी 
 
गुरु पूर्णिमा जन्मोजन्म के गुरुओ को धन्यवाद करने का अवसर हे बिना गुरु परंपरा के तो कभी परमात्मा हुआ ही नहीं जाता ।
 
अगर परमात्मा भी जब मनुष्य का अवतार धारण करके इस पृथ्वीलोक पर आते हे  और बोलते हे तो गुरु रूप में ही बोलते हे ।
 
परमात्मा भी जब मनुष्य का अवतार धारण करके इस पृथ्वीलोक पर आते हे तो जब तक बोलते हे तब तक उन्हें सदगुरु का ही स्थान दिया जाता हे ।
 
जन्मोजन्म के परमात्मा रूपी सदगुरुओं को धन्यवाद करने का अवसर हे गुरुपूर्णिमा का यह दिवस ।

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