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Book summary in hindi – As a man thinketh

Book name – As a man thinketh

Author – James Allen

      इस पुस्तक में यह बताया गया हे की कैसे आप अपने विचारों को बदल कर अपना भविष्य बदल सकते हे |

‘इंसान अपनी तकदीर ख़ुद बनाता है।’

हमारे विचारों में बहुत शक्ति होती है। इनमें इतनी शक्ति होती है कि हम जिन प्रबल विचारों को लंबे समय तक अपने दिमाग़ में रखते हैं, वे अंततः साकार हो जाते हैं और उन्हीं से हमारी तक़दीर बनती है |

अगर विचार अच्छे हैं, तो तक़दीर भी अच्छी होगी, और अगर विचार बुरे हैं, तो तक़दीर भी बुरी होगी।

इस अटल सत्य को हमेशा-हमेशा के लिए पहचान लें कि जैसे आपके विचार होंगे, वैसी ही आपकी तक़दीर होगी, वैसा ही आपका जीवन होगा।

        सायन्स के मुताबिक इंसान के दिमाग़ में हर दिन लगभग 60,000 विचार आते हैं। और यही विचार मिलकर हमारी तक़दीर बनाते हैं।  हमारी तक़दीर में सबसे ज़्यादा योगदान उस विचार का होता है, जो सबसे प्रबल होते हे और जिन्हे हम बार बार दोहराते रहते है।

       जैसे विचार होंगे वैसा चरित्र होगा ‘जैसा मनुष्य अपने दिमाग में सोचता है, वैसा ही वह होता है।’ यह सत्य  जिंदगी की हर स्थिति और हर परिस्थिति पर लागू होता हे।  इसलिए अगर आप अपने जीवन को बदलना चाहते हैं, तो सबसे पहले तो आपको अपने विचारों को बदलना होगा। बिना विचारों को बदलें आप अपना जीवन नहीं बदल सकते ।

Book summary in hindi – As a man thinketh

        जिस तरह से कोई भी पौधा बिना बीज के नहीं उग सकता बिलकुल इसी तरह हमारे सभी कार्य के पीछे कोई न कोई विचार का बीज होता हे | इसलिए विचार पहले आता है, कार्य उसके बाद होता है। 

इंसान अपने दिमाग में जिस  प्रकारके विचारों का बीज बोता है, वह उन्हीं के अनुरूप  फ़सल काटता है। फ़सल कैसी होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कैसे बीज बोए थे। अगर आपने करेले के बीज बोए हे तो फिर आप आम के फलों की उम्मीद नहीं कर सकते हैं |

       यदि किसी इंसान के मन में बुरे और नकारात्मक विचार होते हैं, तो कष्ट उसके जीवन में उसी तरह खिंचा चला आता है, जिस तरह बैल के पीछे गाड़ी खिंची चली आती है | यदि किसी इंसान के विचार पवित्र और निर्मल होते हैं, तो ख़ुशी उसके पास उसी तरह रहती है, जिस तरह से उसकी परछाय रहती है।

Law of cause and effect in hindi

      कारण और परिणाम का नियम इस संसार का सबसे महत्वपूर्ण नियम है। यह अटल और अटूट नियम है। कारण और परिणाम का नियम कहता है कि अगर आप किसी बहुमंजिली इमारत से छलाँग लगाते हैं, तो आप ज़मीन पर गिर जाएँगे। छलाँग लगाना कारण था, गिरना परिणाम। अगर आप आग में हाथ डालोगे तो जलोगे | आग में हाथ डालना  कारण था और जलना परिणाम |

कारण और परिणाम का यह नियम केवल भौतिक संसार में ही लागू नहीं होता। यह विचारों के संसार में भी लागू होता है। 

संसार में जितने भी महान लोग हुए हे वह संयोग या क़िस्मत से नहीं हुए हे बल्कि उन्होंने गलत विचारो को मस्तिष्क में जाने से रोका और सही और नेक विचारों को लंबे समय तक अपने दिमाग में रखा।

इसी तरह जिन लोगों का चरित्र बुरा होता है, वह भी संयोग या क़िस्मत से नहीं होता है। यह तो लंबे समय तक किये गये बुरे विचारो का परिणाम होता है।

आपके जैसे विचार होंगे, वैसा ही आपका चरित्र होगा और जैसा आपका चरित्र होगा, वैसी ही आपकी परिस्थितियाँ होंगी।

    यानी अगर आप अपनी अभी की परिस्थितियों से संतुष्ट हैं, तो आपको अपने विचारों को बदलने की ज़रूरत नहीं है। दूसरी तरफ़, अगर आप अपनी परिस्थितियों से संतुष्ट नहीं हैं, तो इसका मतलब है कि आपको अपने विचारों को बदलने की ज़रूरत है, क्योंकि उन्हें बदलने के बाद ही आपको अपनी मनचाही परिस्थितियाँ मिल सकती हैं।

        इस संसार का एक विचित्र सत्य यह है कि बुरी चीज़ें बड़ी आसानी से हमारे पास आ जाती हैं, जबकि अच्छी चीज़ों को अपने पास लाने के लिए हमें मेहनत करनी पड़ती है। इसी तरह बुरी आदतें डालने में ज़्यादा समय नहीं लगता है, लेकिन अच्छी आदतें डालने में समय लगता है। बुरी परिस्थितियाँ अपने आप आ जाती हैं, लेकिन परिस्थितियों को बेहतर बनाने के लिए हमें मेहनत करनी होती है। अगर आप अपने जीवन की परिस्थितियों को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो यह बात गाँठ बाँध लें: बिना विचारों को बेहतर बनाए आप अपने जीवन की परिस्थितियों को बेहतर नहीं बना सकते। 

As a man thinketh – Book summary in hindi

as a man thinketh quotes in hindi

Book review in hindi

इंसान के जीवन की बाहरी परिस्थितियाँ उसकी आंतरिक अवस्था पर निर्भर करती हे । बाहरी परिस्थितियाँ आंतरिक परिस्थितियों का प्रतिबिंब होती हैं। 

जब तक इंसान ख़ुद को बाहरी स्थितियों के अधीन मानता रहता है, तब तक वह परिस्थितियों के थपेड़े खाता रहता है। लेकिन जब उसे इस बात का अहसास हो जाता है कि अपने जीवन का सृजन करने की शक्ति उसी के पास है, तो फिर वह अपने विचारों के ज़रिये अपने मनचाहे जीवन का सृजन कर लेता है। 

इंसान उस चीज को आकर्षित नहीं करता, जिसे वह चाहता है।

वह तो उस चीज को आकर्षित करता है, जैसा वह अंदर से सचमुच होता है।

इंसान जिस चीज की इच्छा और प्रार्थना करता है, वह उसे नहीं मिलती।

उसे तो वही मिलता है, जिसका वह वाकई हकदार होता है। 

उसकी इच्छाओं और प्रार्थनाओं का जवाब तभी मिलता है और वे तभी पूरी होती हैं, जब वे उसके विचारों और कामों के तालमेल में होती हैं।   

लोग अपनी बाह्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने के प्रयास करते रहते हैं, लेकिनवे ख़ुद को बेहतर बनाने का प्रयास नहीं करते हे और इसीलिए वे हमेशा खुश नही रहते हैं।

अगर आपके जीवनमे दुःख हे, आपकी परिस्थितियाँ सही नहीं हैं, तो क़िस्मत को या ईश्वर को दोष न दें, बल्कि ख़ुद को दोष दें।

ये सारे दुःख तो आप अपने विचारों के कारण उठा रहे हैं।

आप ईश्वर की संतान हैं और ईश्वर कभी नहीं चाहेगा कि आप दुख भरा जीवन जिये। इसलिए बेहतर यही होगा कि आप क़िस्मत को दोष देना छोड़ दें और अपने विचारों को बदलने पर ध्यान केंद्रित करें।

नकारात्मक सोच और नकारात्मक दृष्टिकोण को सकारात्मक सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण से बदल दें। और फिर आप अपनी आँखों से अपनी तक़दीर को बदलते देखेंगे और तब आप इस सत्य को जान जाएँगे कि मनुष्य ख़ुद अपने विचारों से अपनी तक़दीर लिखता है।

यथा दृस्टि तथा सृष्टि 

यानि जैसा हमारा दृष्टिकोण होगा यह सृष्टि बिलकुल वैसी ही हमें दिखाई देगी |

अगर आपने अपनी आँखों पर काले रंग का चश्मा लगा रखा है, तो आपको यह संसार काला दिखेगा।

लेकिन अगर आप काला चश्मा उतारकर गुलाबी चश्मा लगा लें, तो आपको संसार गुलाबी दिखने लगेगा।

यह चश्माऔर कुछ नहीं, बल्कि दृष्टिकोण है।

जब आपका दृष्टिकोण ग़लत होता है, तो संसार ग़लत दिखता है। जब आपका दृष्टिकोण सही होता है, तो संसार सही दिखता है।

मनुष्य को बस ख़ुद को सही करना है और इसके बाद वह देखेगा कि संसार अपने आप सही हो गया है।

आप पाएँगे कि जब आप चीजों और दूसरे लोगों के प्रति अपने विचार बदल लेंगे, तो चीजें और दूसरे लोग भी बदले हुए नज़र आएँगे।  

 इंसान के भीतर जो विचार प्रबल होते हे, जिन विचारों को वह बार बार दोहराता रहेता है, प्रकृति उन्हें साकार करने में हर इंसान की मदद करती है।

प्रकृति उसके सामने ऐसे अवसर पेश करती है, जिससे उसके सबसे प्रबल विचार ऊपर सतह तक आ जाएँ, चाहे वे अच्छे हों या बुरे।

       इंसान को अपने जीवनमें में सही उद्देश्य या लक्ष्य रखना चाहिए और उसे हासिल करने में अपनी सारी शक्ति को लगाना चाहिये। उसे अपने लक्ष्य को अपने सभी विचारों का केंद्र बिंदु बना लेना चाहिए। यह लक्ष्य आध्यात्मिक भी हो सकता है और सांसारिक भी, जो उस वक़्त उसके स्वभाव या प्रकृति पर निर्भर करता है। उसे इस लक्ष्य को हासिल करने को अपना सर्वोच्च कर्तव्य मानना चाहिए। 

Book summary in hindi – As a man thinketh

s a man thinketh quotes in hindi

शंका और डर के विचारों से ना कभी कोई चीज हासिल की गई है और ना ही कभी की जा सकती हे । ये हमेशा असफलता की ओर ले जाते हैं।

शंका और डर रहने से उद्देश्य, ऊर्जा, काम करने की शक्ति और सभी शक्तिशाली विचार थम जाते हैं। अगर आपके मन में शंका है, तो इसका मतलब है कि आपको ख़ुद पर या ईश्वर पर विश्वास नहीं है।

आत्मविश्वास की इस कमी की वजह से आप ज़्यादातर समय दुविधा में रहेंगे और यही सोचते रहेंगे कि आप उस काम को कर पाएँगे या नहीं।

अगर आप डर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आप उस काम को आधे-अधूरेदिल से करेंगे और आधी-अधूरी शक्ति से भी, क्योंकि आपको यह डर है कि कहीं आप असफल न हों।

शंका और डर एकाग्रता के शत्रु हैं। वे आत्मविश्वास के शत्रु हैं। जब तक ये शत्रु आपके दिमाग़ में डेरा डाले रहेंगे, तब तकआप अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए पूरी ताक़त और एकाग्रता से प्रयास नहीं कर पाएँगे।

इसलिए इन्हें अपने दिमाग़ से बाहर निकाल दें और आत्मविश्वास को दिमाग़ में बैठा लें। 

जो शंका और डर को जीत लेता है, वह असफलता को भी जीत लेता है। उसका हर विचार शक्तिशाली हो जाता है। वह तमाम मुश्किलों का बहादुरी से मुकाबला करता है और उन्हें जीत लेता है। 

इसलिए सफलता या असफलता के लिए इंसान ही पूरी तरह जिम्मेदार होता है।

इंसान की कमजोरी और शक्ति, उसकी ख़ुद की होती हैं, इसलिए इन्हें कोई दूसरा नहीं, बल्कि वह ख़ुद ही बदल सकता है।

उसकी परिस्थितिभी किसी दूसरे की नहीं, बल्कि उसकी अपनी है। उसके कष्ट और सुख अंदर से आते हैं। जैसा वह सोचता है, वैसा ही वह होता है। जैसा वह सोचता रहता है, वैसा ही वह बना रहता है। जैसे विचार होंगे, वैसा ही जीवन होगा।अगर विचार उत्तम हैं, तो जीवन भी उत्तम होगा।

      मनुष्य अपने विचारों को ऊपर उठाकर ही ऊपर उठ सकता है, जीत सकता है और उपलब्धि हासिल कर सकता है।  आप क्या करना चाहते हैं, यह पूरी तरह से आप पर और आपके चुनाव पर निर्भर करता है।

आप किसी भी पल अपने विचारों को बदल सकते हैं और जिस पल आप अपने विचारों को बदल लेते हैं, उसी पल आप अपने जीवन को भी बदल लेते हैं।

जैसे जैसे मनुष्य अपने भीतर रहे बुरे विचारों का, बुरी आदतों का त्याग करता जाता हे वैसे वैसे वह सफलता की सीढिया चड़ता जाता हे और नये नये मुकाम हासिल करता जाता हे  जो कम हासिल करना चाहता है, उसे कम त्याग करने की जरूरत है।

लेकिन आसान जीवन के प्रलोभन में न आएँ। बड़ा लक्ष्य रखें। यह न भूलें कि आप ईश्वर की संतान हैं और ईश्वर ने आपको इस संसार में छोटे काम करने के लिए नहीं भेजा था।

ऊँचे सपने देखें, क्योंकि आप जैसे सपने देखते हैं, वैसे ही बनेंगे।

 आपका सपना इस बात का वादा है कि आप एक न एक दिन वैसे ही बनेंगे। आपके मन में सँजोया गया सपना एक भविष्यवाणी है, जिसे आप एक दिन पूरी करेंगे।

हो सकता है कि आपकी परिस्थितियाँ अच्छी न हो, लेकिन वह भी बदल जायेगी अगर आप सिर्फ एक लक्ष्य बना लें और उस तक पहुँचने की कोशिश करें।

जिस सपने को आप अपने दिमाग में अंकित करते हैं, जिस विचार को आप अपने दिल के सिंहासन पर बिठाते हैं, आप अपने जीवन को उसी के अनुरूप बनाते हैं।

       इसीलिए अगर आप इस संसार में सफल होना चाहते हैं,तो अपने विचारों पर सबसे पहले और सबसे बढ़कर ध्यान दें, क्योंकि जैसे आपके विचार होंगे, वैसा ही आपका जीवन होगा। सफलता के विचार सोचेंगे, तो सफल होंगे। असफलता के विचार सोचेंगे, तो असफल होंगे।

महत्वपूर्ण बात यह हे की कौन से विचारों को चुनना यह विकल्प हमारे हाथ में है, तो फिर समझदारी और फायदा इसी में हे की हम सफलता के विचार का चुनाव करे | 

इंसान को हमेशा वैसे ही विचारों को अपने मस्तिष्क में जगह देनी चाहिए, जिन्हें वह साकार करना चाहता हो। 

अगर आप अपने जीवन को सुखद बनाना चाहते हैं, तो सुखद विचार सोचें। अगर आप अपने जीवन को समृद्धबनाना चाहते हैं, तो समृद्धि के विचार सोचें। अगर आप अपने जीवन को स्वस्थ बनाना चाहते हैं, तो स्वास्थ्य के विचार सोचें। और जब आप ऐसा करेंगे, तो आपको परिणाम मिलेंगे, क्योंकि जैसे आपके विचार होंगे, वैसाही आपका जीवन होगा।

Book summary in hindi – As a man thinketh

 

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